Tuesday, December 29, 2015

Observation

Starting the Day with a Positive Thoughts and
1.Meditation
2.Exercise
3.Day Planning
4.Self evaluation

finally will evaluate the Result at the end  of the day.

Monday, December 28, 2015

सब्र कर बन्दे ..

सब्र कर बन्दे ..
मुसीबत के दिन गुजर जायेंगे !!

आज जो तुझे देख के हंसते है ,
वो कल तुझे देखते रह जायेंगे !!

त्याग दे सब ख्वाहिशे ..
कुछ अलग करने के लिए !!

" राम " ने भी खोया बहुत कुछ ,
" श्री राम " बनने के लिए ..!!

Sunday, December 27, 2015

Daily Thought

"To remove other people’s sorrow and give them happiness is the greatest service you can do. You are the children of God, the Ocean of Peace and so you must continue to remove the sorrow of whoever you meet and give them happiness." ~ God Himself

ड्रिंक जो भगा दे चेहरे की झुर्रियों को...........


त्‍वचा पर अगर झुर्रियां पड़ने लगे तो समझ जाना चाहिये कि आप बूढी हो रही हैं। मगर अगर आपकी उम्र ज्‍यादा नहीं है और फिर भी चेहरे पर झुर्रियों का पता साफ चलता है तो सावधान हो जाएं। झुर्रियों को दूर करने के लिये किसी कॉस्‍मेटिक शॉप या पार्लर में जा कर पैसे फूंकने की बजाय अपनी डाइट में अच्‍छे पेय पदार्थ शामिल कीजिये।
हेल्‍दी ड्रिंक ना केवल शक्‍ति देता है बल्कि झुर्रियों से भी लड़ने में सहायक होता है। एंटीऑक्‍सीडेंट और एंटी एजिंग तत्‍व होने की वजह से ये जूस त्‍वचा के लिये काफी फायदेमंद होते हैं। हेल्‍दी पेय जैसे, दूध, पानी, टमाटर का रस, कॉफी आदि बडी़ ही आसानी से उपलब्‍ध होते हैं। इन्‍हें अपनी डाइट में शामिल कीजिये और देखिये कि आपके चेहरे पर कैसे निखार लाते हैं। अब आपको झुर्रियों से बिल्‍कुल भी डरने की आवश्‍यकता नहीं है।1
दूध :-
रात को सोने जाने से पहले एक गिलास दूध जरुर पीजिये। इससे आपकी हड्डियां मजबूत बनेंगी और आपकी मासपेशियो को प्रोटीन मिलेगा। सुबह जब आप सो कर उठेंगी तो आप तरोताजा महसूस करेंगी।
पानी :-
आप जितना ज्‍यादा पानी पियेंगी आपकी त्‍वचा उतनी ही ज्‍यादा ग्‍लो करेगी। आपकी त्‍वचा में नमी पहुंचेगी और अभी और बाद में वह लटकने से बच जाएगी।
कॉफी :-
ब्रेकफास्‍ट के समय यदि आप ब्‍लैक कॉफी पीते हैं तो शरीर में शक्‍ति बढती है। काफी चेहरे को हसीन और चमकदार बनाती है क्‍योंकि इसमें एंटीऑक्‍सीडेंट होता है जो कि चेहरे पर ज्‍लद झुर्रियां नहीं पडने देता।
ग्रीन टी :-
इसमें ढेर सारा एंटी ऑक्‍सीडेंट पाया जाता है जिससे स्‍किन पर झुर्रियां नहीं पडती। दिन भर में दो कप ग्रीन टी पीने से रक्‍त अंदर से साफ होगा जिससे आप पाएगीं बेदाग और निखरी त्‍वचा। ग्रीन टी से चेहरे पर होने वाले मुंहासे और झाइयां दोनों ही दूर होते हैं।
टमाटर का रस :-
इसमें लाइकोपीन होता है जो कि एक एंटी ऑक्‍सीडेंट है। यह त्‍वचा को झुर्रियों से बचाता है और चमकदार त्‍वचा पाने में मदद करता है। आप टमाटर को कच्‍चा खा सकती हैं और इसका रस भी पी सकती हैं। इसका रस पीने से शरीर की गंदगी बाहर निकल जाती है।
गाजर :-
गाजर एक एंटी एजिंग की तरह कार्य करता है। इसमें पाया जाने वाला ढेर सारा बीटा केरोटीन, एंटीऑक्‍सीडेंट हमारे शरीर की कोशिकाओं की मरम्‍मत करता है। इससे कोशिकाओं की उम्र काफी देर से घटती है और शरीर पर झुर्रियां नहीं पडतीं।
संतरा :-
यदि आप प्रतिदिन एक संतरे का सेवन करती हैं, तो इससे झुर्रियां रोकने में मदद मिल सकती है। इसमें कोलाजेन नामक प्रोटीन त्वचा को लचीला बनाए रखने में मदद करता है और विटामिन सी त्‍वचा को बूढा होने से रोकता है।

By Only Ayurved

Question & Answer with Dadi Janki

Healing Anger


There is a lot of anger and resentment between teachers and young people, which is unproductive – it doesn’t help things. How can I deal with this anger better?
I can learn to stay peaceful inside and share that feeling with young people, so that they can free themselves from their own anger.  If someone throws something at me, like an insult or an angry comment, I can just let it drop and leave it lying there. By not picking up another person’s anger, I protect myself and at the same time give them the chance to take it back.
To be angry is to be out of control and so someone who is angry deserves our love and compassion more than ever. By staying in my own peace and patience and keeping my self-respect, I help others to do the same. By seeing people’s good qualities, I empower both myself and them.  This is true generosity.
When I create sweetness inside, I can share it with others. For this I need to spend time in silence and really get to know and love my true, spiritual self and connect with the Divine. At the Brahma Kumaris, we use the words, ‘Om shanti’, which mean ‘I am a peaceful soul’, to remind us of who we really are - no matter what is happening around us.  To be peaceful is to be powerful.  It is also our natural way of being.

छुहारा


परिचय: छुहारा का लैटिन नाम फीनिक्स डेक्टाइलीफेरा है। यह प्रसिद्ध मेवाओं में से एक है। छुहारे एक बार में चार से अधिक नहीं खाने चाहिए, वरना इससे गर्मी होती हैं। दूध में भिगोकर छुहारा खाने से इसके पौष्टिक गुण बढ़ जाते हैं।
रंग : छुहारा स्याही लिए हुए लाल रंग का होता है।
स्वाद : यह मीठा होता है।
स्वरूप : इसका पेड़ खजूर के पेड़ के समान होता है।
स्वभाव : छुहारे शीतल, रूखे और गर्म प्रकृति के होते हैं।
हानिकारक : इसका अधिक मात्रा में सेवन मलस्तंभकारक होता है।
दोषों को दूर करने वाला : दूध छुहारा के दोषों को दूर करता है।
तुलना : इसकी तुलना बादाम और मुनक्का से की जा सकती है।
गुण : छुहारा रुचिकारक, हृदय के लिए लाभकारी, तृप्तकारी, पुष्टकारक, वीर्य-बलवर्द्धक, क्षय (टी.बी.), रक्तपित्त, वातज्वर, अभिघात वमन, वात और कफरोगों को दूर करता है। यह खून को शुद्ध करता है तथा शरीर को मोटा करता है।
छुहारे का अचार : अचार तो बहुत सी चीजों का बनता है, परन्तु छुहारे का अचार काफी गुणकारी अचार होता है।
बनाने की विधि : लगभग 1 किलो छुहारे लेकर पहले नींबू के रस में इन्हें 5 दिन तक भिगोकर रखें। बाद में जब छुहारे फूल जाए तो अन्दर के बीजों को निकालकर निम्न मिश्रण को भरते हैं।
कालीमिर्च, पीपल, तज तीनों की 100 ग्राम मात्रा, सोंठ, जीरा, शाहजीरा तीनों की 50 ग्राम मात्रा कालानमक 300 ग्राम, चीनी 2 किलो सभी को कूट-पीसकर मिश्रण को तैयार कर लेते हैं। छुहारे के उक्त मिश्रण को भरकर एक बर्नी में डाल देते हैं तथा ऊपर से नींबू का रस निचोड़ देते हैं। इस बर्तन को 4-5 दिन धूप में खुला रख देते हैं। बस अचार तैयार है।
इस अचार को भोजन के समय या बाद में खा सकते हैं। यह अचार पाचक व रुचिवर्द्धक होता है तथा अपचन को दूर करता है।
विभिन्न रोगों में छुहारा से उपचार :
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1 शीघ्रपतन:- 2 छुहारे रोजाना खाने से शीघ्रपतन के रोग में लाभ मिलता है और जिन लोगों का वीर्य पतला निकलता है वह गाढ़ा हो जाता है।
2 बिस्तर में पेशाब होना:- *यदि बच्चे बिस्तर में पेशाब करते हो तो रोजाना रात को सोते समय 2 छुहारे खिलाने से लाभ होता है।
*250 मिलीलीटर दूध में 1 छुहारा डालकर उबाल लें। जब दूध अच्छी तरह से उबल जाये और उसके अन्दर का छुआरा फूल जाये तो इस दूध को ठण्डा करके छुआरे को चबाकर खिलाने के बाद ऊपर से बच्चे को दूध पिला दें। ऐसा रोजाना करने से कुछ दिनों में ही बच्चों का बिस्तर पर पेशाब करना बंद हो जाता है।"
3 बुजुर्गों का बार-बार पेशाब आना:- बूढे़ आदमी बार-बार पेशाब जाते हो तो उन्हें
रोजाना 2 छुहारे खिलाना चाहिए तथा रात को 2 छुहारे खिलाकर दूध पिलाना चाहिए।
4 स्वर भंग (आवाज साफ करना):- सोते समय 1 छुहारा दूध में उबालकर खा लेते हैं और दूध को पी लेते हैं इसके सेवन के 2 घंटे बाद पानी न पिये। ऐसा करने से आवाज साफ हो जाएगी।
5 कब्ज:- सुबह-शाम 3 छुहारे खाकर गर्म पानी पियें। छुहारे सख्त होने से खाना सम्भव न हो तो दूध में उबालकर ले सकते हैं। छुहारे रोजाना खाते रहने से बवासीर, स्नायुविक दुर्बलता, तथा रक्तसंचरण ठीक होता है। सुबह के समय 2 छुहारे पानी में भिगोकर रात को इन्हें चबा-चबाकर खाएं। भोजन कम मात्रा में करें या रात को 2 छुहारे उबालकर भी ले सकते हैं। इससे कब्ज दूर हो जाती है।
6 मोटापा:- *छुहारा शरीर में खून को बनाता है। शरीर को बलवान व मोटा बनाता है। दूध में 2 छुहारे उबालकर खाने से मांस, बल और वीर्य बढ़ता है। बच्चे के लिए छुहारा दूध में भिगो देते हैं। जब दूध में रखा छुहारा फूल जाता है तो इसे छानकर, पीसकर बच्चों को पिलाना चाहिए।
*पथरी, लकवा, पीठदर्द: पथरी, लकवा, पीठदर्द में छुहारा सेवन करना लाभदायक होता है। यह मासिक-धर्म को शुरू करता है। छुहारा अवरोधक अर्थात बाहर निकालने वाली चीजों को रोकता है। जैसे दस्त, आंसू, लार, वीर्य और पसीना आदि सभी को रोकता है। छुहारे में कैल्शियम अधिक मात्रा में पाया जाता है। कैल्शियम की कमी से उत्पन्न होने वाले रोग जैसे हडि्डयों की कमजोरी, दांतों का गलना आदि छुहारा खाने से ठीक हो जाते हैं।"
7 नपुंसकता:- *छुहारे को दूध में देर तक उबालकर खाने से और दूध पीने से नपुंसकता खत्म हो जाती है।
*बराबर मात्रा में मिश्री मिले दूध में छुहारों को उबालकर गुठली हटाकर खाने से नपुंसकता दूर हो जाती है और इससे वीर्य, बल, बुद्धि भी बढ़ती है।
*रात को पानी में 2 छुहारे और 5 ग्राम किशमिश भिगो दें। सुबह को पानी से निकालकर दोनों मेवे दूध के साथ खाने से नपुंसकता दूर हो जाती है।
"
8 दमा या श्वास का रोग: - *रोजाना 2 से 4 छुहारा मिश्री मिले हुए दूध में उबालकर गुठली हटाकर छुहारा खाने के बाद वहीं दूध पीने से बहुत लाभ होता है। इससे शरीर में ताकत आती है तथा बलगम निकल जाता है जिससे श्वास रोग (दमा) में राहत मिलती है।
*छुहारा गर्म होता है। यह फेफड़ों और सीने को बल देता है। कफ व सदी में इसका सेवन लाभकारी होता है।
*पान में छुहारा और सोंठ रखकर कुछ दिनों तक चूसने से श्वास रोग (दमा) दूर हो जाता है।
"
9 अंजनहारी, गुहेरी: - छुहारे के बीज को पानी के साथ पीसकर गुहेरी पर दिन में 2 से 3 बार लेप करने से अंजनहारी में बहुत लाभ होता है।
10 गैस:- एक छुहारा बिना गुठली का और 30 ग्राम जयपाल खोपरा, 2 ग्राम सेंधानमक को पीसकर और छानकर 3 खुराक बना लें। 3 दिन तक इस खुराक को
1-1 करके गर्म पानी के साथ सुबह लेने से गैस के रोग समाप्त हो जाते हैं।
11 मसूढ़ों से खून आना:- 2 से 4 छुहारों को गाय के दूध में उबाल लें। उबल जाने पर छुहारे निकालकर खायें तथा बचे हुए दूध में मिश्री मिलाकर पीयें। रोजाना सुबह-शाम इसका सेवन करने से मसूढ़ों से खून व पीव का निकलना बंद हो जाता है।
12 दस्त:- छुहारे के पेड़ से प्राप्त गोंद को 3 ग्राम से लेकर 6 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम चाटने से अतिसार (दस्त) में आराम मिलता है।
13 हकलाना, तुतलाना:- रोजाना रात को सोते समय छुहारों को दूध में उबालकर पीयें। इसको पीने के 2 घण्टे बाद तक पानी न पीयें। इसके रोजाना प्रयोग से तीखी, भोंड़ी, आवाज साफ हो जाती है।
"14 कमरदर्द:- *छुहारे से गुठली निकालकर उसमें गुग्गुल भर दें। इसके बाद छुहारे को तवे पर सेंककर दूध के साथ सेवन करें। सुबह-शाम 1-1 छुहारा खाने से कमर दर्द मिट जाता है।
*सुबह-शाम 2 छुहारों को खाने से कमर दर्द में लाभ होता है।
*बिना बीज वाले छुहारे को पीसकर इसके साथ पिस्ता, बादाम, चिरौंजी और मिश्री मिलाकर, इसमें शुद्ध घी मिलाकर रख दें। 1 सप्ताह बाद इसे 20-20 ग्राम तक की मात्रा में सेवन करने से कमजोरी दूर हो जाती है।
*2-3 छुहारों को स्टील या चीनी मिट्टी के बर्तन में रात-भर पानी में भिगोए रखने के बाद सुबह गुठली अलग कर दें और छुहारे को दूध में पकाकर सेवन करें। इससे कमजोरी मिट जाती है।
*250 ग्राम गुठलीरहित छुहारे, 250 ग्राम भुने चने, 250 ग्राम गेहूं का आटा, 60-60 ग्राम चिलगोजा, बादाम की गिरी, 500 ग्राम गाय का घी, 500 ग्राम शक्कर और 2 लीटर गाय का दूध। दूध में छुहारों को कोमल होने तक उबालें, फिर निकालकर बारीक पीस लें और फिर उसी दूध में हल्की आग पर खोवा बनने तक तक पकाएं। अब घी को आग पर गर्म करके गेहूं का आटा डालकर गुलाबी होने तक धीमी आग में सेंक लें, इसके बाद उसमें चने का चूर्ण और खोवा डालकर फिर धीमी आग पर गुलाबी होने तक भूने। जब सुगंध आने लगे तो इसमें शक्कर डालकर खूब अच्छी तरह मिलाएं। हलवा तैयार हो गया। इसमें और सारी चीजों को डालकर रखें। इसे 50-60 मिलीलीटर की मात्रा में गाय के गर्म दूध के साथ रोजाना 1 बार सेवन करने से कमजोरी मिट जाती है।"
15 पक्षाघात-लकवा-फालिस फेसियल परालिसिस: - दूध में भिगोकर छुहारा खाने से लकवे के रोग में लाभ प्राप्त होता है। एक बार में 4 से अधिक छुहारे नहीं खाने चाहिए।
16 अग्निमान्द्यता (अपच):- छुहारे की गुठली और ऊंटकटोरे की जड़ की छाल का चूर्ण खाने से अग्निमान्द्यता (भूख का न लगना) में आराम मिलता है।
17 मधुमेह के रोग: - गुठली निकालकर छुहारे के टुकड़े दिन में 8-10 बार चूसें। कम से कम 6 महीने तक इसका सेवन करने से मधुमेह में लाभ होता है।
18 सोते समय पेशाब निकलना:- एक छुहारे के 4 हिस्से करके उसको दो बार सुबह और शाम रोगी को देने से सोते समय पेशाब का निकलना बंद हो जाता है।
19 रक्तपित्त:- 2-4 छुहारों को दूध में डालकर ऊपर से मिश्री मिलाकर दूध को उबाल दें गुठली हटाकर खाने से और दूध को पी लेने से रक्तपित्त में लाभ होता है।
20 वीर्य की कमी में: - छुहारा बराबर रूप से दूध में उबालकर खाने से वीर्य बढ़ता है।
21 बुद्धिवैकल्प, बुद्धि का विकास कम होना: - 2 छुहारों और मिश्री को दूध में डालकर उबालें और गर्म हो जाने पर उसकी गुठली को निकालकर छुहारे को हल्के गर्म दूध के साथ लेने से बुद्धि का विकास होता है।
22 उपदंश:- छुहारे को जलाकर राख बनाकर मक्खन के साथ मिलाकर घाव पर लगाने से बहुत लाभ मिलता है।
23 पेशाब का बार-बार आना:- 2 छुहारे 300 मिलीलीटर दूध में उबालकर, छुहारे खाकर दूध पीने से बार-बार पेशाब आने की तकलीफ दूर हो जाती है।
24 दिल की कमजोरी: - दूध में 2 छुहारे उबालकर, छुहारे खाकर दूध पीने से शारीरिक शक्ति बढ़ने से दिल की कमजोरी दूर हो जाती है।
25 सिर चकराना: - 2 या 3 छुहारे रोजाना दूध में उबालकर खाने और दूध पीने से वीर्य की कमी से होने वाला सिर का चकराना ठीक हो जाता है।
26 त्वचा के रोग:- छुहारा खाने से खून साफ हो जाता है और त्वचा के रोग दूर हो जाते हैं।
27 निम्नरक्तचाप:- 2 छुहारे रात को 300 मिलीलीटर दूध में उबालकर खाने और दूध पीने से निम्न रक्तचाप (लो ब्लड प्रेशर) सामान्य हो जाता है।
28 सिर का दर्द:- सिर दर्द होने पर छुहारे की गुठली को पानी में घिसकर माथे पर लेप की तरह लगाने से सिर का दर्द दूर हो जाता है।
29 बच्चों के विभिन्न रोगों में लाभकारी: - *अगर बालक को दस्त कराना हो तो रात को छुहारों को पानी में भिगो दें। सबेरे छुहारों को पानी में मसलकर निचोड़ लें और छुहारे को फेंक दें। उसके बाद वही पानी बच्चे को पिलायें। इससे दस्त साफ होगा। अथवा थोड़े से गुलाब के फूल और चीनी खिलाकर ऊपर से पानी पिला दें। इससे भी दस्त साफ होगा।
*अगर बच्चा कमजोर हो तो उसे उम्र के अनुसार 6 ग्राम से 30 ग्राम तक छुहारे लेकर पानी में धोकर साफ कर लें और गुठली निकालकर दूध में भिगो दें। थोड़ी देर बाद छुहारों को निकालकर सिल पर पीस लें और कपड़े में रस निचोड़ लें। इस तरह दिन में तीन बार हर बार ताजा रस निकालकर बच्चे को पिलायें। बच्चे के शरीर में खूब ताकत आ जायेगी। 1 महीने से कम उम्र के बच्चे को यह रस नहीं पिलाना चाहिए।"
30 शरीर को ताकतवर व शक्तिशाली बनाना: - *लगभग 10 ग्राम छुहारे लेकर पीस लें। रोजाना कम से कम 2 ग्राम की मात्रा में इस छुहारे के चूर्ण को 250 मिलीलीटर हल्के गर्म दूध के साथ सोते समय लेने से शरीर मजबूत होता है। इसका सेवन केवल सर्दियों के दिनों में ही करना चाहिए।
*छुहारा शरीर को मजबूत व शक्तिशाली बनाता है। दूध को गर्म करते समय यदि उसमें छुहारा या खजूर डाल दिया जाए और फिर उस दूध को पियें तो वह शरीर को बहुत ही शक्तिशाली बनाता है।
*छुहारों को दूध में उबालकर खाने से खून बनता है और शरीर में ताकत बढ़ती है।
*4 या 5 छुहारों की गुठलियों को निकालकर इसमें लगभग 260 मिलीग्राम गुग्गुल भर दें और इन छुहारों को दूध में पकायें। सुबह और शाम को रोजाना 1 छुहारा दूध के साथ खाने से वातरोग दूर हो जाते हैं और शरीर शक्तिशाली बनता है।
*लगभग 500 मिलीलीटर की मात्रा में दूध लेकर उसमें 2 छुहारे डाल दें। अब दूध के आधा रह जाने तक गर्म करें, फिर इस दूध में 2 चम्मच मिश्री या चीनी लेकर मिलाकर पीयें और छुहारे को खा जायें। इसको खाने से शरीर में मांस बढ़ता है, शरीर की ताकत बढ़ती है और मनुष्य का वीर्य बल भी बढ़ता है। छुहारा खून बढ़ाता है। इसका प्रयोग केवल सर्दी के दिनों में ही करना चाहिए। इसका सेवन करने के 2 घंटे तक पानी नहीं पीना चाहिए। एक बार में चार से ज्यादा छुहारों का सेवन नहीं करना चाहिए।
*किसी मिट्टी या कांच के बर्तन में पानी लेकर इसमें 2 छुहारे शाम को भिगोकर रख दें। सुबह उठकर इन छुहारों की गुठली को निकालकर इन्हें लगभग 500 मिलीलीटर दूध में गर्म करें और 250 मिलीलीटर दूध रह जाने तक गर्म करें। अब बचे हुए दूध को पीने से शरीर की कमजोरी खत्म हो जाती है और शरीर को भरपूर मात्रा में ताकत मिलती है।"
31 गले के रोग:- *छुहारा खाने से कंठ (गला) सूखना दूर हो जाता है।
*भोजन करने के बाद रात को सोते समय दूध में उबाले हुए छुहारों को खाने से आवाज साफ हो जाती है। इसको खाने के बाद डेढ़ से 2 घंटे तक पानी नहीं पीना चाहिए।
*गला सूखने पर छुहारे की गुठली मुंह में रखकर चूसना चाहिए। "
Krishankumar Dawer

स्टैंडअप इंडिया पॉलिसी

#‎मनकीबात‬: 16 जनवरी को स्टार्टअप इंडिया और स्टैंडअप इंडिया पॉलिसी का ऐलान होगा: पीएम Narendra Modi

Reliance Jio

On the eve of Reliance's Founder Chairman Dhirubhai Ambani's 83rd anniversary, Reliance Jio will roll out its 4G service for its employees at a mega event in Navi Mumbai. Shah Rukh Khan and AR Rahman will host the function at Reliance Corporate Park on December 27.

Take care of your families and health

I urge all of you, whatever the pressure or deadline, take care of your families and health: Mukesh Ambani 

आदमी को पहचानने का फन

बातों से सीखा है हमने, आदमी को पहचानने का फन।
जो हल्के लोग होते है, हर वक्त बातें भारी भारी करते हैं।
संसद की एक समिति ने गृह मंत्रालय से दिल्‍ली पुलिस में महिलाओं की संख्‍या बढ़ाकर 33% करने को कहा है।
गृह मंत्रालय संबंधी संसदीय स्‍थायी समिति के अनुसार, दिल्‍ली पुलिस में महिलाओं की संख्‍या 9% से कुछ ही ज्‍यादा है।

वर्तमान में जीएं, कल तो एक अंतहीन प्रतीक्षा है

मनुष्य हमेशा से ही आने वाले कल के भरोसे आज से भागता रहा है। परंतु कब तक कल के भरोसे अपने वर्तमान से भागेंगे अथवा ऐसा करते रहेंगे? क्या कल ने कभी किसी का साथ दिया है? कल का आगमन कभी हुआ भी है क्या? कल तो एक अंतहीन प्रतीक्षा है, एक भरोसा है। एक ऐसी आशा, एक ऐसा छलावा, एक ऐसा भविष्य है, जिसके सहारे कुछ समय तक जिया जा सकता है।
कल को जानकर भी आप कल के लिए क्यों आज को खोना चाहते हैं। यह मानव स्वभाव की एक मृगमरीचिका है, जिससे निजात पाए बिना हम अधिक बेहतर की उम्मीद नहीं कर सकते। कल अगर जीवन की आशा है तो जीवन का मृत्युवाहक भी है। कल अगर भाग्य है, तो अभाग्य का घर भी है। कल हमेशा संशयात्मक है। आने वाले कल से आज से वे ही मुक्त हो सकते हैं, जिनमें चेतनता है, सजगता है, जो क्रियाशक्ति और ज्ञानशक्ति का विकास कर आत्मदर्शन करना चाहते हैं। हम अक्सर अपने आस-पास के वातावरण पर ध्यान नहीं देते हैं, परंतु वस्तुत: हर कोई हमें उपयोग करने का प्रयास करता है। जीवन के सारे रिश्ते-नाते और उससे जुड़े सांसारिक संबंध हमें स्मृतियों का ऐसा संसार देते हैं, जो प्रायश्चित और पश्चाताप की अग्नि से हमें तपाते हैं।
योगी हमेशा समाधि में भी तो नहीं रह सकता। मृत्यु जब भी आती है-संस्कार लेकर, प्रारब्ध बनकर और कर्मफल की क्रमश: गति बनकर। सब धोखा दे सकते हैं, परंतु मृत्यु कभी नहीं। अगर मृत्यु की तरह हर कोई वफादार हो जाए, तो जिंदगी कभी बेवफा नहीं हो सकती। अफसोस यह सब जानकर और समझकर भी लोग एक-दूसरे से आगे बढऩे की होड़ में लगे हुए हैं। उस व्यक्ति का वर्तमान भी ठीक रहेगा, जो ठहर गया है। उसके लिए न तो वर्तमान में कोई उत्सव है, और न ही कल का शोक। बुद्ध पुरुषों के आत्मज्ञान की दुनिया में कोई संशय नहीं, कोई तर्क नहीं, आगे बढ़ जाने की कोई होड़ नहीं, आवागमन का कोई भय नहीं, छल-प्रपंच के लिए कोई जगह नहीं होती। आज ही प्रयास करें, कल के भरोसे न रहें। स्वयं के अस्तित्व की तलाश में जुटें। स्थितप्रज्ञ बनने का प्रयास करें। यही जीवन का सच्चा रूपांतरण होगा।


ज्योतिषाचार्य “पंकज कुमार” 
खाने में कोई 'ज़हर' घोल दे तो
एक बार उसका 'इलाज' है..
लेकिन 'कान' में कोई 'ज़हर' घोल दे तो,
उसका कोई 'इलाज' नहीं है।

हर व्यक्ति को कर्म करने के लिए प्रयत्नशील रहना चाहिए

भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा था, 'हे अर्जुन तुम कर्म करने के लिए बाध्य हो, तुम्हें कर्म करना चाहिए। कर्म के बिना जीवन का किसी भी प्रकार निर्वाह नहीं हो सकता। आलस्य, दुर्बलता का त्याग करके खड़े हो जाओ और जो तेरा निहित कर्म है उसे करो। बगैर कर्म के इहलोक और परलोक, दोनों ही सार्थक नहीं हो सकते।
इसलिए इहलोक या परलोक, दोनों अवस्थाओं में कर्म के बगैर व्यक्ति नहीं रह सकता। इसलिए तू कर्म कर।Ó ये कथन भगवान कृष्ण ने अर्जुन से स्पष्ट तौर पर कहे थे कि तू बैरागी, त्यागी, ज्ञानवान आदि न होकर, केवल कर्म करने वाला बन, जबकि अर्जुन हर प्रकार से पात्र था। वह बल, बुद्धि, विवेक आदि गुणों को धारण करने वाला था। फिर भी भगवान ने अजरुन को कर्म में ही लगाया। ऐसा लगता है कि आज सत्ता में आसीन कुछ लोगों ने इस देश को कर्महीन बनाने का मन बना लिया है। ऐसा इसलिए, क्योंकि महाराजा और राजा दोनों के प्रवचन में आज आलस्य के अलावा और कुछ दिखाई नहीं देता। ऐसा इसलिए, क्योंकि दोनों त्याग की बात करते हैं-एक जगत को मिथ्या कहकर त्यागने की बात कहता है तो दूसरा कर्म को मिथ्या कहकर कि हम तुम्हें एक रुपये प्रति किलोग्राम अन्न देंगे, जिसका अनुमानित मूल्य भी 16 रुपये से लेकर 20 रुपये तक है। इसे हम आपको निशुल्क भी देंगे और खर्चे के लिए कुछ जेब खर्च भी देंगे।
आज चारों ओर समाज के अनेक संचालक गण केवल लोगों को कर्महीन होने के लिए अग्रसर करते जा रहे हैं। आज भारत के कितने गांव-नगर के वासी यातायात, बिजली व पानी की सहूलियतों के बगैर परेशान हैं। आज आप बात करते हैं महानगरों की जहां आजादी से लेकर आज तक पर्याप्त बिजली उपलब्ध है। यदि यही बिजली गांव को भी दी जाती तो वहां भी अच्छा शहर बसा होता, न कोई अनुदान चाहता और न कोई भीख मांगता, बल्कि आज सरकार को टैक्स के रूप में देश के विकास के लिए धन मिल रहा होता। समय बदला है, रहन-सहन बदला है, भेष-भूषा, यातायात, सेल फोन की संक्षिप्त बोलचाल आदि सभी बदले हैं तो आपको भी आलस्य छोड़कर बदलना होगा।
जो लोग अपने को बदल लेते हंै वे सब कुछ पा लेते हंै और जो अपने को असहाय समझते हैं, वे दूसरों पर निर्भर रह जाते हैं। इसलिए हर व्यक्ति को कर्म करने के लिए प्रयत्नशील रहना चाहिए।


Written by: ज्योतिषाचार्य “पंकज कुमार” 

तम्बाकू सेवन

विश्वभर में तम्बाकू सेवन मृत्यु का सबसे बड़ा कारण बन रहा है, Indian council of Medical Research के आकड़ों के अनुसार भारत में हर साल तम्बाकू की वजह से दस लाख से अधिक लोगों की मौत होती है

#‎stopsmoking‬
http://www.dnaindia.com/…/report-long-term-smoking-may-hamp…

Sunar

The term Sunar may derive from the Sanskrit suvarna kār, "worker in gold"

https://en.wikipedia.org/wiki/Sunar

Saturday, December 26, 2015

outstanding quote

•Sun rises everywhere..
but crop grows only where the farmer has worked hard.
God is everywhere..
but his grace is only for one who works hard.
•An outstanding quote:
we are valuable..
Only if we have something that money cannot buy.
•Doubt and Faith both are states of mind.
Doubt creates the darkest moments in our finest hour.
Faith brings finest moments in our darkest hour.
मुझे ढुंढने की कोशिशे अब मत किया कर,
तुने रास्ता बदला तो हमने मंजिल।

सफलता

दूर से हमें आगे के सभी रास्ते बंद नजर आते हैं क्योंकि सफलता के रास्ते हमारे लिए तभी खुलते जब हम उसके बिल्कुल करीब पहुँच जाते है|
Vikash Behera

===== बहुत ही सुन्दर वर्णन है========

मस्तक को थोड़ा झुकाकर देखिए....
अभिमान मर जाएगा
आँखें को थोड़ा भिगा कर देखिए.....
पत्थर दिल पिघल जाएगा
दांतों को आराम देकर देखिए.........
स्वास्थ्य सुधर जाएगा
जिव्हा पर विराम लगा कर देखिए.....
क्लेश का कारवाँ गुज़र जाएगा
इच्छाओं को थोड़ा घटाकर देखिए......
खुशियों का संसार नज़र आएगा.....

परिवार

पत्थर तब तक सलामत है,जब तक
वो पर्वत से जुड़ा है,
पत्ता तब तक सलामत है जब तक
वो पेड़ से जुड़ा है,
इंसान तब तक सलामत है जब तक
वो परिवार से जुड़ा है,
क्योंकि,परिवार से अलग होकर
आजादी तो मिल जाती है,
लेकिन संस्कार चले जाते है.

कठिनाईयां

“कठिनाईयां भगवान का संदेश होती हैं; और जब हमें उनका सामना करना पड़ता है तो हमें उनका भगवान के विश्वास के रुप में, भगवान से अभिनंदन के रुप में सम्मान करना चाहिए। ”

बुरा वक्त

जिन्दगी में अगर बुरा वक्त नही आता तो… अपनों में छुपे हुए गैर, और गैरो मे छुपे हुए अपने कभी नजर नहीं आते !!

गीता

गीता के एक-एक शब्द मे सत्य हैं!
सदैव संदेह करने वाले व्यक्ति के लिये प्सन्नता ना इस लोक मे हैं ना हि कहीं और !

चेहरे की रंगत बढाए टमाटर का जूस

चेहरे की रंगत बढाए टमाटर का जूस..आजमाईये जरूर
रोज सवेरे एक गिलास ताजे टमाटर का जूस तैयार करें, दो चम्मच शहद मिलाकर सेवन करें और सिर्फ़ एक महिने के अंदर चेहरे की रंगत देखिए, आईना शरमा जाएगा l जानकार इसे वजन कम करने का एक अच्छा उपाय मानते है जबकि गुजरात के आदिवासी इसे यकृत और फ़ेफ़डों के लिए बेहतर टोनिक मानते है..आजमाईये जरूर, देसी ज्ञान है, असर सर चढकर बोलेगे..स्वस्थ रहें, मस्त रहें..

🌿बाजरा खाइए🌿


🌿हड्डियों के रोग नहीं होंगे🌿
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बाजरे की रोटी का स्वाद
जितना अच्छा है,
उससे अधिक उसमें गुण भी हैं..

🌿- बाजरे की रोटी खाने
वाले को हड्डियों में कैल्शियम
की कमी से पैदा होने वाला
रोग आस्टियोपोरोसिस
और खून की कमी यानी
एनीमिया नहीं होता...
🌿- बाजरा लीवर से
संबंधित रोगों को भी कम
रता है...
🌿- गेहूं और चावल के
मुकाबले बाजरे में ऊर्जा कई
गुना है...
🌿- बाजरे में भरपूर
कैल्शियम होता है,
जो हड्डियों के लिए रामबाण
औषधि है..
उधर आयरन भी बाजरे में
इतना अधिक होता है कि खून
की कमी से होने वाले रोग
नहीं हो सकते..
🌿- खासतौर पर गर्भवती
महिलाओं ने कैल्शियम की
गोलियां खाने के स्थान पर
रोज बाजरे की दो रोटी खाना
चाहिए...
🌿- वरिष्ठ चिकित्साधिकारी
मेजर डा. बी.पी. सिंह के,
सेना में सिक्किम में तैनाती के
दौरान जब गर्भवती महिलाओं
को कैल्शियम और आयरन
की जगह बाजरे की रोटी और
खिचड़ी दी जाती थी...
इससे उनके बच्चों को जन्म
से लेकर पांच साल की उम्र
तक कैल्शियम और आयरन
की कमी से होने वाले रोग
नहीं होते थे...
🌿-इतना ही नहीं बाजरे का
सेवन करने वाली महिलाओं में
प्रसव में असामान्य पीड़ा के
मामले भी न के बराबर पाए
गए...
🌿- डाक्टर तो बाजरे के
गुणों से इतने प्रभावित है..
कि इसे अनाजों में वज्र की
उपाधि देने में जुट गए हैं..
🌿- बाजरे का किसी भी रूप
में सेवन लाभकारी है..
🌿- लीवर की सुरक्षा के
लिए भी बाजरा खाना
लाभकारी है..
🌿- उच्च रक्तचाप, हृदय की कमजोरी, अस्थमा से ग्रस्त लोगों तथा दूध पिलाने वाली माताओं में दूध की कमी के लिये यह टॉनिक का कार्य करता है..
🌿- यदि बाजरे का नियमित रूप से सेवन किया जाय तो यह कुपोषण, क्षरण सम्बन्धी रोग और असमय वृद्ध होने की प्रक्रियाओं को दूर करता हैं...
🌿- रोगी की खपत से शरीर प्राकृतिक रूप से शान्त होता है...
यह एंग्जायटी, डिप्रेशन और नींद न आने की बीमारियों में फायदेमन्द होता है..
यह माइग्रेन के लिये भी
लाभदायक है..
🌿- इसमें लेसिथिन और मिथियोनिन नामक अमीनो अम्ल होते हैं
जो अतिरिक्त वसा को हटा कर कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करते हैं..
🌿- बाजरे में उपस्थित रसायन पाचन की प्रक्रिया को धीमा करते हैं..
डायबिटीज़ में यह रक्त में शक्कर की मात्रा को नियन्त्रित करने में सहायक होता है...

By Anita Bedi

आलोचना करने वालो का स्वागत करिये,

आलोचना करने वालो का स्वागत करिये,
उन्हे सफाई देने की आवश्कता नही है ||
आलोचको से सीख लिजीऐ,
और कमी को पुरा कीजीऐ, वे हमारे जीवन को फिल्टर रुपी साफ (छवि) करने का काम करते है ||

''तुम संघर्ष करो''

लोग कहते हैं
''तुम संघर्ष करो'' हम तुम्हारे साथ हैं ,
पर अगर वो सच में साथ होते ,

तो हमें संघर्ष करने की जरूरत ही नहीँ पड़ती...!

Dadi Janki‬

"Serve through your face. Simply smile.
When you smile, the other person smiles back

दोष

किसीमें दोषोंको देखकर उस व्यक्तिसे घृणा नहीं करनी चाहिये, लेकिन दोषोंसे घृणा करनी चाहिये कि वे दोष हममें कहीं न आ जायँ l

Rajyoga Meditation


To change any habit we take care of 4 aspects. Gyan – Knowledge, Yog – Meditation, Dharna -Inculcation of qualities and Seva - Sharing.
Meditation means to check your emotional blockages, see the thoughts behind it and then replace those thoughts with the truth. For eg. No one loves me is the blockage. Replace it with, I am a Loveful soul, I will give love and acceptance to everyone.
Rajyoga Meditation means connecting to the Supreme Power, God and taking His powers and love to heal our blockages.

BK Shivani

PM Modi is inspiring Bhartiya Culture in the world.

PM Modi is inspiring Bhartiya Culture in the world.
During his recent visit to Moscow, Russian Pop Singer Sati Kazanova welcome PM Modi with Shree Ganesh Vandana and other Vedic Mantras.
Ms Kazanova is Muslim by birth and Hindu by choice. She also wants to build a grand temple in Moscow...

सब सुखी हों- यह भावना होनी चाहिए

एक अच्छी और सच्ची जिंदगी जीने के लिए मनुष्य के पास उन रास्तों का ज्ञान होना बहुत जरूरी है, जो उसे अपने लक्ष्य तक पहुंचाते हैं। इन्हीं रास्तों पर आगे बढ़ते हुए हर मनुष्य की सब सुखी हों- यह भावना होनी चाहिए। हम अपने कर्म और वाणी से ऐसा एक भी शब्द न निकालें और न ऐसा कृत्य करें, जो दूसरों को कष्ट पहुंचाता हो।
यह वाणी के संयम और कर्म के विवेक से ही संभव हो सकता है, लेकिन हमारी स्थिति आज उस सुंदरी की तरह है, जो चाहती है कि सारी दुनिया उसे प्यार करे परंतु वह किसी को प्यार न करे। अक्सर हम भूल जाते हैं कि यह संसार आदान-प्रदान पर चलता है। जैसा हम बोएंगे, वैसा फल हमें मिलेगा। पाश्चात्य दार्शनिक वेंडल विल्की ने लिखा था कि जिस प्रेम, सहिष्णुता, परदुखकातरता, परोपकार, संवेदना और भाईचारे की जरूरत है, उसका लोगों में अभाव है। विल्की का स्वप्न अधूरा ही रह गया। यह स्वप्न कोरा विल्की का ही नहीं महावीर, बुद्ध, गांधी, आचार्य तुलसी जैसे महापुरुषों का भी था, जो अधूरा ही रह गया। इसमें कोई संदेह नहीं कि आपसी प्रेम और आपसी मेल का अपना महत्व है और उससे वह शक्ति उत्पन्न होती है, जो और किसी चीज से पैदा नहीं हो सकती, लेकिन आज का मानव व्यापक हितों को नजरअंदाज कर अपने निजी स्वार्थों को देख रहा है। वर्तमान समय की सारी व्याधियां इन्हीं क्षुद्र स्वार्थों और संकीर्ण मानसिकता के कारण हैं।
संसार में जितने भी संत-मनीषी हुए हैं, उन्होंने सदा दूसरों के सुख और परोपकार के लिए प्रयत्न किया है। वे उस मां के समान हैं जो सबको पुत्रवत मानती है और सबको खिला-पिलाकर स्वयं खाती पीती है और सबको सुलाकर स्वयं सोती है। उसके सामने 'परÓ का महत्व होता है, 'स्वÓ का नहीं। यही वह तत्व है, जिसके कारण वह स्वयं गीले में सोती है और अपनी संतान को सूखे में सुलाती है। मां स्वयं कष्ट सहन करके भी अपनी संतान को सुख सुविधा पहुंचाने के लिए लालायित रहती है। अगर जीवन को ऊंचाई देनी है, तो बुनियाद उतनी ही गहरी होनी चाहिए। मकान उतना ही ऊंचा और मजबूत बनता है। 'सब सुखी होंÓ की आदर्श स्थिति स्थापित करने के लिए एक साथ अनेक अच्छाइयों का अभ्यास करना होता है। इस कठिन साधना और जीवन मूल्यों की श्रेष्ठता से जुड़कर ही हमारा व्यक्तित्व आदर्श बनता है।


Written by: ज्योतिषाचार्य “पंकज कुमार” 

ईश्वर किस प्रकार कृपा करते है

कोई विपदा आते ही अपने भाग्य पर दोषारोपण करने लगना और ईश्वर की सत्ता पर विश्वास अस्थिर हो उठना एक सामान्य मानवीय प्रतिक्रिया है। हताशा मन-मस्तिष्क को घेर लेती है। हताशा से समस्या का न तो सही आकलन हो पाता है और न ही उससे जूझने के लिए पर्याप्त शक्ति संयोजित हो पाती है। क्या सदा-सर्वदा निरापद और सुखद जीवन ही सौभाग्य है और ईश्वरीय कृपा का प्रतीक है? ईश्वर किस प्रकार कृपा करता है, इसे समझना अति आवश्यक है।
ईश्वर की कृपा और सौभाग्य की अनुभूति अन्य जीवों से अपनी तुलना करते ही स्पष्ट होने लगती है। जितने जीव जल में विचरण कर रहे हैं, उतने ही थल पर हैं। उनमें से मनुष्य की शारीरिक रचना सबसे सुगठित और सुचालित है। मनुष्य अपनी इंद्रियों और बौद्धिक चेतना के कारण सभी जीवों में श्रेष्ठ है। यह एक बड़ा उपकार ही मनुष्य के परमात्मा के प्रति किसी भी प्रकार के संदेह को निमरूल सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है। मनुष्य योनि का प्राप्त होना जीव को अवसर प्रदान करता है अपने आत्मिक विकास का ताकि वह चौरासी लाख योनियों के चक्र से मुक्त हो सके और अपने मूल अर्थात परम शक्ति में विलीन हो सके। मृत्यु के पश्चात शरीर यहीं पंच तत्व में विलीन हो जाता है। जीवात्मा कहां जाती है, यह संसार में किसी को भी ज्ञात नहीं है, किंतु हर मनुष्य जन्म से मृत्यु तक की प्रक्रिया का साक्षी अवश्य बनता है। इसका गंभीर चिंतन, मनन करने के बाद संपूर्ण प्रक्रिया के सामान्य कष्टों का बार-बार संवाहक कौन बनना चाहेगा। अन्य कोई जीव नहीं बस एक मनुष्य ही सौभाग्यशाली है कि इससे मुक्त होने में सफल हो सकता है। इस तरह मनुष्य पर ईश्वर की कृपा अपार है और भाग्य के सारे द्वार खुले हुए हैं। इसके बाद भी विपत्तियां आना और जीवन में दुख आखिर किस ओर इंगित करने वाले हैं। ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो विपत्तियों व समस्याओं ने ही मानव कल्याण की राह खोली है। यदि भगवान राम को वनवास हुआ और सीता हरण हुआ तभी मानवता को मर्यादा पुरुषोत्तम का सद प्रेरणाप्रद चरित्र मिला।
महाभारत ने भगवद्गीता का उपहार दिया। कबीर समाज से तिरस्कृत होकर काशी से मगहर गए, तो कबीर वाणी अमर हो गई। सिख गुरुओं की शहादत ने धर्म-संस्कृति और सभ्यता को कालकवलित होने से बचा लिया। विपत्तियां सदैव मनुष्य को निखारने और बड़ी विपत्ति से बचाने के लिए होते हैं।


Written by: ज्योतिषाचार्य “पंकज कुमार”

कब, मृत्यु का भय खत्म हो जाता है

किसी भी कीमत पर किसी भी स्थिति में जीते चले जाने की इच्छा को ही जीवेषणा कहते हैं। सीधे शब्दों में कहें, तो शरीर के साथ उत्पन्न हुए अतिरिक्त मोह को, हमारा शरीर सतत बना रहे और कभी समाप्त न हो, ऐसी कामना का आधार ही जीवेषणा है। शरीर नश्वर है। हम किसी न किसी को रोज मरते देखते हैं। उस क्षण मन में हमें एकबारगी कंपन का अहसास होता है।
ऐसा क्यों होता है? क्या हमने कभी सोचा है? वास्तव में ऐसा हमारे द्वारा शरीर के साथ किए गए तादात्म्य के कारण होता है। हम शरीर के साथ ऐसे एकाकार हो गए हैं कि शरीर को ही स्वयं यानी चेतना मान लिया है। हमारी सत्ता शरीर से भिन्न है और हमें शरीर को उपकरण की तरह उपयोग में लाना है, लेकिन इस बात को हम मानें भी तो कैसे? जब हमारे अनुभव में ये बात आती ही नहीं कि हमारी सत्ता शरीर से भिन्न है। हम इस शरीर को केवल अपना ठिकाना बनाए हुए हैं। शरीर को स्वयं की सत्ता समझ लेने का भ्रम ही हमें यह अहसास कराता है कि मृत्यु के साथ हम स्वयं समाप्त हो जाएंगे। यही नहीं बल्कि शरीर के तादात्म्य के कारण ही हमें युवा, अधेड़ व वृद्ध होने का अहसास होता है। जबकि मन की गति को जरा रोककर अगर हम आत्मस्थित होने की चेष्टा करें, तो हमें अहसास होगा कि हमारे भीतर वह चेतना मौजूद है जो न युवा होती है और न ही वृद्ध। शरीर हमसे भिन्न है और ऊपर-ऊपर ही बदलता है।
चेतना की न तो कोई उम्र होती है और न ही वह नष्ट होती है। नित्य मिल रही जानकारियों और सूचनाओं को हम अपनी स्मृति में एकत्र करते जाते हैं। इस बौद्धिक विकास को ही हम अपना विकास यानी युवा होना, वृद्ध होना और इसका विनाश ही मृत्यु मान लेते हैं। ऐसा स्वाभाविक है। जब तक हमें उस तत्व की झलक नहीं मिलती, जो इस शरीर की वृद्धि व तर्क-वितर्क में उलङो मन के पार है और किसी भी स्थिति में उसके नष्ट होने का कोई उपाय नहीं, तब तक हम शरीर की नश्वरता के पार नहीं जा सकते। वह चेतन तत्व जो हम ही हैं, हमारी ही परम् सत्ता है, इसका अहसास होते ही शरीर से हमारा तादात्मय टूटना आरंभ हो जाता है और मृत्यु भय समाप्त होता चला जाता है। अंतत: यह पता चलता है कि मृत्यु एक खेल है। इस मनोदशा में व्यक्ति के अंतर्मन में मौजूद मृत्यु का भय खत्म हो जाता है।


Written by: ज्योतिषाचार्य “पंकज कुमार” 

हार्दिक शुभकामनायें

डॉ. नवरत्नमल कड़ेल जी (MBBS) को "अखिल भारतीय स्वर्णकार समाज विकास एवं शोध संस्थान" के "प्रदेश सह संयोजक - विशिष्ट प्रतिभा प्रकोष्ठ, राजस्थान प्रदेश" पद पर मनोनीत किए जाने के सुअवसर पर  हार्दिक शुभकामनायें !

हार्दिक शुभकामनायें

स्वर्णकार जगदीश प्रसाद कड़ेल जी को "अखिल भारतीय स्वर्णकार समाज विकास एवं शोध संस्थान" के "प्रदेश प्रचार प्रसार सचिव - विशिष्ट प्रतिभा प्रकोष्ठ, राजस्थान प्रदेश" पद पर मनोनीत किए जाने के सुअवसर पर  हार्दिक शुभकामनायें !

Monday, December 14, 2015

God

Weakness

माँ

Information

Lesson

Life

“He, who reigns within himself, and rules passions, desires, and fears, is more than a king.”

कर्म

समय

रिश्ते

रोने से तो आंसू भी पराये हो जाते है...
लेकिन मुस्कुराने से पराये भी अपने हो जाते है..

मुझे वो रिश्ते पसंद है,
जिनमें "मैं" नहीं "हम" हो....!!!
           

Love yourself

Love yourself first and everything else falls into line...
You really have to love yourself to get anything done in this world!

A Great Soul

Saturday, December 12, 2015

Friday, December 11, 2015

Congratulation

Real Hero

गंजापन

मूँगफली

कलियुग

कलियुग क्या है ?
कलियुग यानी कि मशीनी युग । इसलिए कलियुग में मनुष्य मशीन की तरह काम करके शांति और संतुष्टि पाना चाहता है किंतु मशीन आदि से त्वरित सुश भले ही मिले पर शास्वत शांति नहीं मिलती । धन कमाना आवश्यक है ।लेकिन सिद्धांत यह है कि कमाएं नीति से, संसार, परिवार में रहें संतों एवं शास्त्रों की बनाई रीति से और प्रभू को भजें प्रीति से । नीति, रीति और प्रीति के त्रिसूत्रात्मक सिद्धांत से मनुष्य आनंदमय जीवन पा सकता है ।

Meditation's benefits

Take care

Congratulation

Good morning

सभी योद्धाओं में से सबसे ताकतवर समय और धैर्य है ।

Wednesday, December 9, 2015

Beutiful view

Very beautiful view 

Relax

Relaxing at park

Thought

A good laugh is the world's best tonic.

Thought of the day

Very touching thought

ज्ञान की बातें

रास्ते पर कंकड़ ही कंकड़ हो
तो भी एक अच्छा जूता पहनकर
उस पर चला जा सकता है..

लेकिन यदि एक अच्छे जूते
के अंदर एक भी कंकड़ हो तो
एक अच्छी सड़क पर भी
कुछ कदम भी चलना मुश्किल है ।।

यानी -
"बाहर की चुनोतियों से नहीं
हम अपनी अंदर की कमजोरियों
से हारते हैं "

Tuesday, December 1, 2015