गठिया:(Gout) रोग : सरल उपचार : : .
अश्वगन्धा (असगंध) की जड और मिश्री दोनों समान भाग लेकर कूट-खांडकर महीन बनाकर कपडे में छानकर इस पावडर को शीशी में भर लें। ४ से ६ ग्राम की मात्रा में गर्म दूध के साथ सुबह -शाम उपयोग करें। गठिया के जिस रोगी ने बिस्तर पकड लिया हो वह भी इस योग से चलने फ़िरने योग्य हो जाएगा। गठिया का दर्द भी समाप्त हो जाएगा। असगंध की कच्ची जड़ में अश्व (घोड़े) के समान गन्ध आती है इसलिए इसे अश्वगन्धा कहा जाता है। इसका विधिवत ढंग से पूरे शीतकाल सेवन करने पर घोड़े की तरह शक्ति, पुष्टि और स्फूर्ति उपलब्ध होती है, इससे भी इसका नाम सार्थक सिद्ध होता है। यह जड़ी पंसारियों की दुकान पर आसानी से हर गांव-शहर में मिल जाती है।
अश्वगन्धा (असगंध) की जड और मिश्री दोनों समान भाग लेकर कूट-खांडकर महीन बनाकर कपडे में छानकर इस पावडर को शीशी में भर लें। ४ से ६ ग्राम की मात्रा में गर्म दूध के साथ सुबह -शाम उपयोग करें। गठिया के जिस रोगी ने बिस्तर पकड लिया हो वह भी इस योग से चलने फ़िरने योग्य हो जाएगा। गठिया का दर्द भी समाप्त हो जाएगा। असगंध की कच्ची जड़ में अश्व (घोड़े) के समान गन्ध आती है इसलिए इसे अश्वगन्धा कहा जाता है। इसका विधिवत ढंग से पूरे शीतकाल सेवन करने पर घोड़े की तरह शक्ति, पुष्टि और स्फूर्ति उपलब्ध होती है, इससे भी इसका नाम सार्थक सिद्ध होता है। यह जड़ी पंसारियों की दुकान पर आसानी से हर गांव-शहर में मिल जाती है।