Wednesday, January 6, 2016

बेशकीमती तोहफा


एक राजा ने दूसरे राजा के पास एक पत्र और सुरमे की एक छोटी सी डिबिया भेजी।पत्र में लिखा था की जो सुरमा भिजवा रहा हूँ वह अत्यंत मूल्यवान है।
इसे लगाने से अंधापन दूर हो जाता है।
राजा सोच में पड़ गया। वह समझ नही पा रहा था कि इसे किस किस को दे।
उसके राज्य में नेत्रहीनों की संख्या अच्छी खासी थी, पर सुरमे की मात्रा बस इतनी थी, जिससे दो आँखों की रोशनी लौट सके।
राजा इसे अपने किसी अत्यंत प्रिय व्यक्ति को देना चाहता था ।
तभी राजा को अचानक अपने एक वृद्ध मंत्री की स्मृति आई वह मंत्री बहुत ही बुद्धिमान था मगर आंखों की रोशनी चले जाने के कारण उसने राजकीय काम काज से छुट्टी ले ली थी और घर पर ही रहता था ।
राजा ने सोचा कि उसकी आंखों की ज्योति वापस आ गई तो उसे उस योग्य मंत्री की सेवाएं फिर से मिलने लगेंगी ।
राजा ने मंत्री को बुलावा भेज दिया था और उसे सुरमे की डिबिया देते हुए कहा था इस सुरमे को आंखों में डाले आप पुनः देखने लग जाएंगे ।
ध्यान रहे यह केवल दो आंखों के लिए है मंत्री ने एक आंख में सुरमा डाला उसकी रोशनी आ गई उस आँख से मंत्री को सब कुछ दिखने लगा फिर उससे फिर उसने बचा हुआ सुरमा अपनी जीभ पर डाल दिया यह देख कर राजा चकित रह गया उसने पूछा यह आपने क्या किया अब तो आपकी एक ही आंख में रोशनी आ पाएगी, लोग आप को काने कहेंगे । मत्री ने जवाब दिया राजन चिंता ना करें मैं काना नहीं रहूंगा ।
मैं आंख वाला बनकर हजारो नेत्रहीनों को रोशनी दूंगा । मैंने चखकर यह जान लिया है कि सुरमा किस चीज से बना है मै अब स्वयं सुरमा बनाकर नेत्रहीनों में बाटूंगा ।
राजा ने मंत्री को गले लगाया और कहा यह हमारा सौभाग्य है कि मुझे आप जैसा मंत्री मिला । अगर हर राज्य के मंत्री आप जैसी हो जाए तो किसी को कोई दुख नहीं होगा।
Moral:
इसलिए हमें न केवल अपना ही हित सोचना चाहिए बल्कि सबके हित के बारे में सोचना चाहिए। दूसरों का हित करने से ख़ुशी मिलती है।
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